दो बिल्ली और बंदर की कहानी भाग 1: बिल्ली और बंदर का संघर्ष
दो बिल्ली और बंदर की कहानी– बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में मिटी और पिटी नाम की दो बिल्ली रहती थीं। दोनों एक-दूसरे की गहरी मित्र थीं और सारा समय साथ खेला करती थीं। वे कभी भी एक-दूसरे से दूर नहीं रहतीं, चाहे वह खाने का समय हो या फिर खेल का। उनकी यह दोस्ती गाँव में प्रसिद्ध थी, और हर कोई उनकी एकता की मिसाल दिया करता था।
गाँव में एक शरारती बंदर भी था, जिसका नाम चीकू था। चीकू चालाक और धूर्त था, और उसे दूसरों की दोस्ती में दरार डालने का बड़ा शौक था। वह हमेशा किसी न किसी की दोस्ती को तोड़ने की कोशिश करता, और फिर उस स्थिति का मजा लेता। मिटी और पिटी की गहरी दोस्ती देखकर चीकू को एक नई शरारत करने की सूझी। उसने सोचा, “क्यों न इन दोनों बिल्लियों के बीच फूट डाल दी जाए?”
एक दिन, चीकू ने मिटी से मिलने का नाटक किया और उसके पास गया। उसने कहा, “मिटी, क्या तुम्हें नहीं लगता कि पिटी तुम्हारे साथ धोखा कर रही है? वह तुम्हारी पीठ पीछे तुम्हारे बारे में बुरा बोलती है। वह तुम्हारी दोस्ती का सही मतलब नहीं समझती।”(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
मिटी को यह सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी सबसे अच्छी दोस्त पिटी उसके बारे में इस तरह सोचेगी। वह चुप हो गई और मन ही मन सोचने लगी, “क्या यह सच हो सकता है?” उसने चीकू पर तुरंत विश्वास तो नहीं किया, लेकिन उसके मन में एक शक का बीज जरूर बो दिया गया।
कुछ देर बाद, चीकू पिटी के पास गया और उससे भी वही बात कही। “पिटी, क्या तुम्हें नहीं लगता कि मिटी तुम्हारी सच्ची दोस्त नहीं है? उसने गाँव में कई जगह तुम्हारी बुराई की है।”
अब पिटी भी चिंतित हो गई। उसे मिटी पर शक होने लगा। उसने सोचा, “मिटी ऐसा कैसे कर सकती है? हम तो सबसे अच्छे दोस्त हैं।”
अब धीरे-धीरे मिटी और पिटी के बीच बातचीत कम होने लगी। पहले जहाँ वे हर बात एक-दूसरे से साझा करती थीं, अब वे एक-दूसरे से दूर रहने लगीं। गाँव में लोग भी यह बदलाव देखने लगे। उनकी दोस्ती अब बिखरने लगी थी, और वे पहले जैसे घनिष्ठ मित्र नहीं रहीं।(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)

हेलो दोस्तो ! आपका इस वेबसाइट में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – "दो बिल्ली और बंदर की कहानी" | Hindi Kahani | हिंदी कहानी | Hindi Story" यह एक Motivational Story है। अगर आपको Hindi Kahani, Short Story in Hindi पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।
चीकू यह देखकर खुश था। उसकी योजना सफल हो रही थी। उसने मिटी और पिटी के बीच फूट डाल दी थी, और अब वह उन्हें पूरी तरह से अलग करने की कोशिश में जुट गया। उसने दोनों को और भी ज्यादा भड़काने के लिए अलग-अलग झूठी बातें फैलानी शुरू कर दीं।
एक दिन, गाँव में मिटी और पिटी को एक बड़ा टुकड़ा रोटी का मिल गया। दोनों ने सोचा कि इस रोटी को मिल-बाँटकर खा लेंगे, लेकिन उनके मन में शक की दीवार अब इतनी बड़ी हो चुकी थी कि वे यह तय नहीं कर पा रही थीं कि रोटी का कौन-सा हिस्सा किसे मिलेगा।
मिटी चिढ़कर बोली, ‘तुम हमेशा मुझसे चीजें छीन लेती हो। ये रोटी मेरी है।’ पिटी गुस्से में जवाब दी, ‘मैंने इसे उठाया, यह मेरा है!’ दोनों की आवाज़ें अब इतनी ऊँची हो गई थीं कि गाँव के लोग भी सुन सकते थे।(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
दोनों बिल्लियों में रोटी के टुकड़े को लेकर बहस शुरू हो गई। किसी तरह वे उस टुकड़े को आपस में बाँटने के लिए राजी नहीं हो पा रही थीं। अंततः, उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए चीकू की मदद लेने का निर्णय किया।
चीकू को जब यह पता चला कि बिल्लियों ने उसे फैसला करने के लिए चुना है, तो उसकी चालाकी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया। उसने सोचा, “यह मेरे लिए अच्छा मौका है। मैं इन दोनों को और बेवकूफ बना सकता हूँ और रोटी भी हड़प सकता हूँ।”(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
चीकू ने गंभीरता से दोनों बिल्लियों की बात सुनी और कहा, “दोस्तों, तुम दोनों मेरी नज़रों में बराबर हो। मैं इस रोटी को बराबर-बराबर बाँट दूँगा, ताकि कोई भी अन्याय न हो।”
यह सुनकर मिटी और पिटी खुश हो गईं, क्योंकि उन्हें लगा कि अब उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा।
चीकू ने बड़ी चतुराई से रोटी का एक हिस्सा तोड़ा, लेकिन जान-बूझकर एक टुकड़ा बड़ा और दूसरा छोटा कर दिया। उसने मिटी और पिटी से कहा, “अरे, यह तो सही से बराबर नहीं हुआ। मुझे इसे फिर से ठीक करना पड़ेगा।”(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
फिर उसने बड़े टुकड़े को काटकर थोड़ा सा हिस्सा खा लिया, और कहा, “अब यह सही हो गया।” लेकिन अब दूसरा टुकड़ा बड़ा हो गया। इस तरह चीकू बार-बार दोनों टुकड़ों को काटता गया और हर बार वह थोड़ा-थोड़ा रोटी खाता गया।
मिटी और पिटी चुपचाप खड़ी रहीं और चीकू की बातों पर विश्वास करती रहीं। वे सोच रही थीं कि चीकू निष्पक्ष होकर रोटी बाँट रहा है। लेकिन उन्हें यह एहसास नहीं हो रहा था कि चीकू धीरे-धीरे पूरी रोटी खा रहा है।(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
चीकू को बहुत मजा आ रहा था। उसने दोनों बिल्लियों के बीच फूट डाल दी थी और अब वह उनकी रोटी भी खा रहा था। जब अंत में केवल एक छोटा सा टुकड़ा बचा, तो चीकू ने कहा, “अब यह बचा हुआ टुकड़ा तो बहुत छोटा है। इसे मैं ही खा लेता हूँ, ताकि कोई विवाद न हो।”(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
यह सुनते ही मिटी और पिटी को समझ में आ गया कि वे चीकू की चाल में फँस चुकी हैं। दोनों बहुत पछताईं, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने न तो रोटी बाँटी और न ही अपनी दोस्ती बचा पाईं। चीकू ने उनके बीच फूट डालकर अपनी चाल पूरी कर ली थी।
दो बिल्ली और बंदर की कहानी भाग 2: समझदारी और मित्रता की वापसी
मिटी और पिटी के बीच की लड़ाई अब और बढ़ने लगी थी। दोनों एक-दूसरे से बातचीत करने से भी कतराने लगीं और हर छोटी-बड़ी बात पर झगड़ने लगीं। दोनों के बीच की पुरानी दोस्ती कहीं खो चुकी थी, और उनकी आपसी नफरत अब खुलकर सामने आ रही थी। यह देखकर चीकू, जो इस सारी स्थिति का जिम्मेदार था, अंदर से बहुत खुश था। उसने सोचा कि उसकी चालाकी सफल हो चुकी है और अब कोई उसे दोषी भी नहीं ठहरा सकता, क्योंकि उसने सिर्फ अपनी ‘बुद्धिमानी’ का इस्तेमाल किया था।(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
हालांकि, समय के साथ चीकू की खुशी धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी। पहले वह बिल्लियों की लड़ाई से आनंदित होता था, लेकिन अब उसे बिल्लियों के बीच की नफरत में कोई मज़ा नहीं आ रहा था। मिटी और पिटी की दूरी ने उनके खेल, हंसी-मज़ाक, और मजेदार दिनों को खत्म कर दिया था। पहले जहाँ चीकू को उनके बीच हंसी-ठिठोली देखने का मौका मिलता था, अब सिर्फ झगड़े और शिकायतें बची थीं। गाँव में भी सबको यह खटकने लगा था कि पहले जो बिल्लियाँ एक साथ रहती थीं, अब वे हर वक़्त झगड़ रही थीं।(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
एक दिन, चीकू अपनी मस्ती में एक पेड़ पर चढ़ा हुआ था। वह हमेशा की तरह उछल-कूद कर रहा था, जब अचानक उसका पैर फिसल गया और वह धड़ाम से ज़मीन पर गिर पड़ा। चीकू के पैर में गहरी चोट लग गई। दर्द के मारे वह जोर से चिल्लाया, लेकिन उस वक्त वहाँ कोई और नहीं था जो उसकी मदद कर सके। पहले वह सोचता था कि अगर उसे कभी कोई चोट लगेगी, तो मिटी और पिटी जरूर उसकी मदद करेंगी, क्योंकि वे उसकी दोस्त थीं। पर अब, उसकी खुद की शरारतों की वजह से, वह अकेला था। उसे यह एहसास हो रहा था कि उसने उन दोनों की दोस्ती तोड़कर कितनी बड़ी गलती की थी।(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
चीकू दर्द से कराहता हुआ मदद के लिए इधर-उधर देखता रहा। तभी अचानक मिटी और पिटी पास से गुजर रही थीं। उन्होंने चीकू की आवाज सुनी और उसकी तरफ दौड़ीं। मिटी ने पिटी से कहा, “देखो, चीकू को कितनी बुरी चोट लगी है। हमें उसकी मदद करनी चाहिए।” पिटी ने भी सहमति जताई। दोनों ने अपनी लड़ाई भूलकर तुरंत चीकू की मदद करने का फैसला किया।
मिटी और पिटी ने मिलकर चीकू को उठाया और धीरे-धीरे उसे अपने घर तक ले गईं। उन्होंने उसके पैर पर पट्टी बाँधी और उसे आराम करने के लिए बिस्तर पर लिटा दिया। चीकू को यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि जिन बिल्लियों को उसने एक-दूसरे से लड़ाया था, वे आज उसकी मदद कर रही थीं। वह मन ही मन अपनी करनी पर पछताने लगा।
जब चीकू थोड़ी देर बाद आराम से बैठा, तो उसने मिटी और पिटी से कहा, “मैं तुम दोनों से माफी माँगना चाहता हूँ। मैंने जान-बूझकर तुम्हारी दोस्ती में दरार डालने की कोशिश की थी। मैंने तुम दोनों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़काया, ताकि मुझे मज़ा आए। पर अब मुझे एहसास हो गया है कि मैंने कितना बड़ा गलत काम किया है।”
मिटी ने गंभीरता से कहा, “हमें शुरू से ही समझ जाना चाहिए था कि तुम हमारी दोस्ती को खत्म करने की कोशिश कर रहे हो। लेकिन हम तुम्हारी बातों में आ गए और अपनी दोस्ती खो बैठे।”
पिटी ने भी अपनी राय साझा की, “हमें एक-दूसरे पर विश्वास रखना चाहिए था। लेकिन अब यह अच्छी बात है कि हम समझ गए हैं और अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने का मौका मिला है।”
चीकू ने अपनी गलती मान ली और कहा, “मैं वादा करता हूँ कि अब से मैं कभी भी तुम्हारी या किसी और की दोस्ती को तोड़ने की कोशिश नहीं करूँगा। मुझे सिखाई गई सबसे बड़ी बात यह है कि सच्ची दोस्ती को नष्ट करना बहुत आसान होता है, लेकिन उसे वापस पाना बहुत मुश्किल होता है।”(दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
मिटी और पिटी ने एक-दूसरे की तरफ देखा और मुस्कुराईं। उन्होंने महसूस किया कि उनकी पुरानी दोस्ती अब भी कायम है। वे चीकू की गलती को माफ करने के लिए तैयार थीं, क्योंकि उन्होंने सीखा कि इंसान (या जानवर) से गलती हो सकती है, लेकिन उसे सुधारने का मौका भी दिया जाना चाहिए। दोनों ने चीकू को माफ कर दिया और फिर से अच्छे दोस्त बन गए।
कुछ ही दिनों में, मिटी, पिटी, और चीकू के बीच फिर से हंसी-मज़ाक और खेल-कूद शुरू हो गया। अब तीनों साथ मिलकर खेलते, हँसते, और अपनी पुरानी यादों को ताज़ा करते। गाँव के लोगों ने भी यह बदलाव देखा और सबको खुशी हुई कि पुरानी दोस्ती फिर से मजबूत हो गई थी। (End दो बिल्ली और बंदर की कहानी)
दो बिल्ली और बंदर की कहानी कहानी का अंत और सीख
मिटी और पिटी ने एक बार फिर अपनी दोस्ती की ताकत को महसूस किया और समझा कि सच्चे दोस्त हमेशा एक-दूसरे का साथ देते हैं, चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं। उन्होंने चीकू को उसकी गलती का एहसास दिलाया, लेकिन उसे माफ भी कर दिया, क्योंकि वे जानती थीं कि हर कोई गलती करता है, परंतु सबसे महत्वपूर्ण होता है उस गलती से सबक लेना और उसे सुधारना।
चीकू, जो पहले दूसरों की दोस्ती में दरार डालने में मज़ा लेता था, चीकू ने गहरे पछतावे के साथ महसूस किया कि जब उसने दूसरों के बीच फूट डाली थी, तब वह खुद भी सच्ची खुशी खो चुका था। अब उसे समझ में आया कि खुशियाँ बाँटने से ही मिलती हैं, न कि दूसरों को चोट पहुँचाकर।, न कि उन्हें दुख पहुँचाने से। उसने भी अपने भीतर एक बदलाव महसूस किया और भविष्य में अपने दोस्तों की मदद करने का संकल्प लिया।
दो बिल्ली और बंदर की कहानी की शिक्षा (Moral of the Story)
- सच्ची मित्रता अमूल्य होती है: सच्चे दोस्त वही होते हैं जो मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देते हैं। दोस्ती को बनाए रखने के लिए विश्वास और समझदारी की जरूरत होती है।
- शरारतों से केवल नुकसान होता है: किसी की दोस्ती को तोड़ने या दूसरों को धोखा देने से खुद का ही नुकसान होता है। दूसरों के बीच फूट डालने से कोई खुशी नहीं मिलती।
- माफी और समझदारी से रिश्ते सुधरते हैं: यदि आपसे कोई गलती हो जाती है, तो उसे स्वीकार करना और माफी माँगना सबसे बड़ी समझदारी होती है। दूसरों को माफ करना और उन्हें दूसरा मौका देना रिश्तों को फिर से मजबूत कर सकता है।
- कठिन समय में सहानुभूति दिखाना जरूरी है: कठिन समय में दूसरों की मदद करना और सहानुभूति दिखाना दोस्ती को और भी गहरा बना देता है।”
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