
बचपन से ही हम सबने कई प्रकार की बाल कहानियाँ सुनी हैं, लेकिन ek bhookhi lomdi ki kahani उन चुनिंदा कहानियों में से एक है जो हर उम्र के व्यक्ति को जीवन की एक बहुत बड़ी सच्चाई समझाती है। आइए पढ़ते हैं इस अनोखी और शिक्षाप्रद कहानी को विस्तार से।
1. जंगल में भोजन की तलाश और लोमड़ी की बेचैनी
एक सुंदर और घने जंगल में एक चतुर लोमड़ी रहती थी। वह बहुत ही चालाक और फुर्तीली थी। एक दिन गर्मी का मौसम था और सूरज चमक रहा था। सुबह से ही लोमड़ी को खाने के लिए कुछ नहीं मिला था। दोपहर होते-होते उसे बड़ी ज़ोरों की भूख लगने लगी। उसका पेट मारे भूख के तड़प रहा था।
लोमड़ी ने भोजन की तलाश में पूरे जंगल का कोना-कोना छान मारा। वह कभी पेड़ों की झाड़ियों के पीछे देखती, तो कभी छोटे जानवरों के बिलों के पास रुकती। लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया। काफी देर भटकने के बाद वह बहुत थक गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह अपनी भूख कैसे मिटाए।
तभी उसने निर्णय लिया कि जंगल से सटे हुए पास के गाँव और खेतों की तरफ जाना चाहिए, शायद वहाँ कुछ खाने को मिल जाए। इस तरह ek bhookhi lomdi ki kahani आगे बढ़ती है।
2. सुंदर बगीचा और रसीले अंगूरों का दृश्य
लोमड़ी धीरे-धीरे चलते हुए जंगल की सीमा पार कर एक बड़े किसान के फल वाले बगीचे में पहुँच गई। उस बगीचे में तरह-तरह के सुंदर पेड़-पौधे और फल लगे हुए थे। लेकिन जैसे ही लोमड़ी की नज़र बगीचे के बीचों-बीच बने एक ऊँचे मंडप (Trellis) पर पड़ी, उसकी आँखें खुशी से चमक उठीं।
वहाँ अंगूर की बेलें लिपटी हुई थीं, जिन पर बड़े-बड़े, पके हुए और रसीले बैंगनी अंगूरों के गुच्छे लटक रहे थे। धूप में वे अंगूर मोती की तरह चमक रहे थे। उन रसीले अंगूरों को देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया।
लोमड़ी अंगूरों के गुच्छों के बिल्कुल नीचे जाकर खड़ी हो गई और ऊपर की तरफ देखने लगी। उसकी भूख और तेज़ हो गई थी।
3. ऊँचे अंगूरों तक पहुँचने का कठिन प्रयास
समस्या यह थी कि अंगूर के गुच्छे बहुत ऊँचाई पर लटक रहे थे। लोमड़ी ने थोड़ा पीछे हटकर नाप-जोख की और पूरी ताकत लगाकर ऊपर की ओर छलांग लगाई। लेकिन अफ़सोस! वह अंगूरों तक नहीं पहुँच पाई और धड़ाम से ज़मीन पर आ गिरी।
लोमड़ी ने अपनी असफलता से हार नहीं मानी। उसने सोचा कि शायद पहली बार में छलांग की दिशा सही नहीं थी। उसने अपनी सांसें संभालीं, थोड़ा और पीछे गई और इस बार दोगुनी ताकत से ऊपर की ओर उछली। लेकिन अंगूर उसकी पहुँच से कुछ इंच ही दूर रह गए।
लोमड़ी लगातार प्रयास करती रही। वह बार-बार उछलती, गिरती, उठती और फिर से छलांग लगाती। प्रयास करते-करते वह पसीने से लथपथ हो गई और उसकी बची-कुची ताकत भी खत्म हो गई। फिर भी, अंगूर इतने ऊँचे थे कि उसकी हर छलांग नाकाम साबित हुई। यह दृश्य ek bhookhi lomdi ki kahani को एक बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ पर लाकर खड़ा करता है।
4. हार मानकर बहाना बनाना: ‘अंगूर खट्टे हैं’
जब लोमड़ी पूरी तरह से थककर चूर हो गई और उसे अहसास हो गया कि वह अपनी शारीरिक क्षमता से उन ऊँचे अंगूरों को नहीं तोड़ सकती, तो वह निराश हो गई। उसकी शारीरिक हिम्मत टूट चुकी थी, लेकिन उसका अहंकार अभी भी बरकरार था।
उसने देखा कि पास के पेड़ पर बैठा एक तोता उसकी हर छलांग को ध्यान से देख रहा था। लोमड़ी को लगा कि अगर वह बिना अंगूर लिए ऐसे ही चली जाएगी, तो तोता और जंगल के अन्य जानवर उसकी नाकामी पर हँसेंगे।
इसलिए अपनी झेंप मिटाने और अपनी असफलता पर पर्दा डालने के लिए लोमड़ी ने अपनी नाक सिकोड़ी, एक तिरछी नज़र अंगूरों पर डाली और ज़ोर से बोली ताकि तोता सुन सके:
यह कहकर लोमड़ी सिर उठाकर शान से वहाँ से टहलते हुए निकल गई। लेकिन मन ही मन वह जानती थी कि अंगूर मीठे थे, बस उसकी मेहनत और रणनीति में कमी थी। इस तरह ek bhookhi lomdi ki kahani का यह मशहूर प्रसंग पूरा होता है।
🌟 कहानी की मुख्य सीख (Moral of the Story)
इस प्रसिद्ध ek bhookhi lomdi ki kahani से हमें जीवन के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण शिक्षाएं मिलती हैं:
- अपनी नाकामी पर बहाने न बनाएं: जब हम किसी काम में असफल होते हैं, तो चीज़ों या परिस्थितियों में दोष निकालने के बजाय अपनी कमी को स्वीकार करना चाहिए।
- सच्ची मेहनत और सही दिशा आवश्यक है: केवल बार-बार कूदने से सफलता नहीं मिलती; यदि लोमड़ी कोई लकड़ी या पत्थर रखकर चढ़ने का तरीका सोचती, तो शायद वह अंगूरों तक पहुँच जाती।
- अहंकार से बचें: लोग अक्सर अपनी कमज़ोरी को छिपाने के लिए दूसरों की बनाई चीज़ों को ‘खट्टा’ यानी बेकार बता देते हैं। हमें इस सोच से बचना चाहिए।
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